8 महीने के बच्चे को कितनी गीली लंगोट रखनी चाहिए?HealthPlanet

Posted on Thu 2nd Mar 2023 : 10:26

शिशुओं में लंगोट क्षेत्र में चकत्ते (नैपी रैश)

लंगोट क्षेत्र में होने वाले चकत्ते (नैपी रैश) शिशुओं में काफी आम हैं, खासकर कि नौ से 12 महीनों की उम्र के शिशुओं में। इसलिए, यदि कभी मातृत्व के किसी चरण पर शिशु की नैपी बदलते समय आपको उसके नितंब की त्वचा लाल दिखाई दे तो, परेशान न हों। चाहे आप सूती (कॉटन) लंगोट इस्तेमाल करें या फिर डिस्पोजेबल, ऐसा दोनों के इस्तेमाल से हो सकता है।
लंगोट से होने वाले चकत्ते कैसे दिखाई देते हैं?
यदि आपके शिशु को नैपी रैश है, तो उसके नैपी क्षेत्र की त्वचा लाल और सूजी हुई दिख सकती है। चकत्ते संभवतया उसके जननांगों, जांघों की सिलवटों की बाहरी त्वचा में और उसके नितंबों पर हो सकते हैं।

प्रभावित क्षेत्र शुष्क या नमीयुक्त और कई बार फुंसीदार दिख सकता है।

नैपी रैश की तस्वीरें देखने के लिए आप हमारी बचपन में होने वाले चकत्तों का स्लाइडशो देख सकती हैं।

यदि मूल नैपी रैश का उपचार न किया जाए, तो यह किसी बदतर स्थिति में तब्दील हो सकता है, जैसे कि:

फंगल या यीस्ट इनफेक्शन, जैसे कि थ्रश (कैंडिडा)। यह किसी भी शिशु के साथ हो सकता है, मगर एंटिबायोटिक्स ले रहे शिशुओं में यह अधिक आम है। ऐसा इसलिए क्योंकि एंटिबायोटिक्स यीस्ट को नियंत्रण में रखने वाले 'गुड' बैक्टीरियां को मार देते हैं। इनकी शुरुआत छोटे लाल निशान से होती है, जो बढ़कर बड़ी संख्या में लाल दानें बन जाते हैं।

जीवाण्विक इनफेक्शन। इनके साथ बुखार भी हो सकता है और आमतौर पर इनसे पस निकलते पीले धब्बे या पस से भरी फुंसियां होती हैं।

नैपी रैश किस वजह से होते हैं?
नैपी रैश होने के बहुत से कारण हैं। मुख्यत: ये नैपी में किए गए पेशाब और मल के गीलेपल के संपर्क में आने से होता है। लंबे समय तक गंदी नैपी पहने रहने से शिशु को नैपी रैश होने की संभावना अधिक होती है।

नवजात शिशु बहुत बार पेशाब करते हैं और बार-बार पतला मलत्याग करते हैं। चाहे नैपी कितनी भी बेहतर तरीके से गीलापन अवशोषित करती हो, मगर फिर भी शिशु की नाजुक त्वचा पर थोड़ी नमी रह ही जाती है। इस वजह से शिशु की त्वचा का आड़ (बैरियर) की तरह काम करना मुश्किल हो जाता है, जिससे त्वचा मे जलन व असहजता होने की संभावना बढ़ जाती है।

जिन शिशुओं की त्वचा संवेदनशील या शुष्क हो या जिन्हें एक्जिमा हो, उन्हें नैपी रैश होने की संभावना अधिक होती है, चाहे उनकी नैपी समय-समय पर बदली जाती हो, फिर भी।

दस्त (डायरिया) का दौर भी आपके शिशु को नैपी रैश होने का खतरा बढ़ा देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका मल विस्तृत क्षेत्र तक फैल जाता है और सामान्य से अधिक गीला होता है। एंटिबायोटिक ले रहे शिशुओं को दवा के साइड-इफेक्ट के तौर पर डायरिया हो सकता है और पतले दस्त से नैपी रैश हो सकते हैं।

जो शिशु घुटनों के बल या फिर खड़े होकर चलने लगे हैं, उन्हें नाजुक त्वचा पर लगतार नैपी की रगड़ (खासकर गीली नैपी की) लगने से चकत्ते हो सकते हैं।

कभी-कभार, नैपी रैश किसी और वजह से भी हो सकते हैं। शिशु को उसकी त्वचा पर लगाए गए किसी उत्पाद से एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इसे अंग्रेजी में एलर्जिक (कॉन्टेक्ट) डर्माटाइटिस कहा जाता है, मगर शिशुओं को यह होना काफी दुर्लभ है।

एलर्जिक डर्माटाइटिस किसी अलग ब्रांड की नैपी पहनाने से या फिर नई साबुन, क्लींजर या बेबी वाइप इस्तेमाल करने से भी हो सकता है। कई बार इसके कारण का स्पष्ट तौर पर पता चल जाता है, क्योंकि नए उत्पाद के इस्तेमाल के तुरंत बाद ये चकत्ते होने लगते हैं।
नैपी रैश से शिशु को बचाने के लिए मैं क्या कर सकती हूं?
नितंबों में गीलापन न रहने देना और त्वचा को मॉइस्चराइज्ड रखना, नैपी रैश से सुरक्षा के बेहतरीन उपाय हैं। अपने शिशु की त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने के लिए निम्न तरीके आजमाएं:

शिशु की नैपी जरुरत के हिसाब से समय-समय पर बदलती रहें- हर बार पेशाब या मलत्याग के बाद।

हर बार मलत्याग के बाद शिशु के जननांगों को सौम्यता से मगर अच्छे से साफ करें और फिर इसे सूखने दें।

आप शिशु के नितंबों को तौलिये से पौंछकर सुखा सकती हैं या फिर आप हवा से सूखने के लिए उसे कुछ समय के लिए बिना नैपी पहनाएं छोड़ सकती हैं। मजबूत हाथों से जल्दी-जल्दी रगड़ें या पौछें ना क्योंकि इससे शिशु की नाजुक त्वचा में असहजता हो सकती है।

यदि आपके शिशु को नैपी रैश होते रहते हैं, तो पैट्रोलियम जैली या फिर डॉक्टर द्वारा बताई गई जिंक आॅक्साइड युक्त बैरियर क्रीम की एक परत शिशु के नितंबों पर लगा दें।

नैपी को इतना कस कर न बांधें कि उसमें हवा की आवाजाही की जगह न बचें। नैपी ढीली नहीं होनी चाहिए, मगर इतनी तंग भी नहीं होनी चाहिए कि शिशु के नितंबों तक हवा न पहुंचे।

यदि आपके शिशु को नैपी रैश होते रहते हैं, तो सूती लंगोट पर प्लास्टिक का कवर लगाने की बजाय अवशोषक नैपी लाइनर या डिस्पोजेबल नैपी शायद बेहतर रहेंगी। ये उसे अधिक सूखा रखने में मदद करेंगी।

यदि मौसम विशेषतौर पर गर्म या आर्द्र हो, तो आप दिन में कुछ घंटों के लिए शिशु को बिना नैपी पहनाए रहने दें। अधिकांश माँएं शिशु को ढीला पजामा पहना देती हैं और प्लास्टिक की शीट के ऊपर सूती कपड़ा लगाकर शिशु को उसपर बिठा देती हैं, ताकि बिस्तर गंदा न हो। निस्संदेह, ऐसा आप तभी कर सकती हैं जब आपके पास बार-बार शिशु के कपड़े बदलने और उसे साफ करने का समय हो या फिर शिशु की देखभाल के लिए आपके पास कामवाली हो।

दिन के सबसे गर्मी वाले समय में शिशु को बिना नैपी पहनाएं रखने से फायदा हो सकता है, क्योंकि कई बार जांघों या कमर पर जहां नैपी थोड़ी तंग होती है, वहां उसे पसीना इकट्ठा होने से घमौरियां हो सकती हैं।

पुरानी मान्यता के विपरीत, नैपी रैश से बचने या इसके उपचार के लिए टैल्क्म पाउडर के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती। यदि नम त्वचा पर पाउडर लगाया जाए तो रगड़ लगने और जीवाणुओं व यीस्ट को विकसित होने और कई गुणा बढ़ने का प्रोत्सा​हन मिलता है। इससे नैपी रैश की स्थिति और बदत्तर हो सकती है।

यदि आप शिशु को टैल्कम पाउडर लगाना चाहती हैं, तो पहले शिशु से दूर थोड़ा सा पाउडर अपने हाथ में लें और शिशु की त्वचा पर थपथपाते हुए लगाएं। शिशु पर सीधे पाउडर न छिड़के। और साथ ही यह हमेशा सुनिश्चित करें कि पाउडर लगाने से पहले शिशु की त्वचा सूख गई हो। टैल्कम पाउडर के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में हमारा यह लेख पढ़ें, 'क्या शिशु को टैल्कम पाउडर लगाना सुरक्षित है?'
नैपी रैश का सबसे बेहतर उपचार क्या है?
नैपी रैश के उपचार के तरीके नीचे बताए गए हैं:

समय-समय पर शिशु की नैपी बदलती रहें, ताकि शिशु साफ और सूखा रहे।

जितना अधिक हो सके शिशु को बिना नैपी के रहने दें, ताकि हवा की आवाजाही रहे और त्वचा सूखी रहे। जब शिशु झपकी ले रहा हो, तो उसे एक साफ तौलिये पर लिटाएं। यदि शिशु चलने फिरने लगा है, तो उसे दिन में कुछ समय बिना नैपी के खेलने दें।

शिशु के नितंब साफ करें। आप ऐसा पानी या फिर असुगंधित और एल्कोहॉल मुक्त वाइप्स से कर सकती हैं। आप थोड़ा सा सौम्य लिक्विड बेबी क्लींजर भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके बाद, नितंबों को सादे पानी से धो दें और हल्के से थपथपाकर त्वचा को सुखाएं।

यदि आप डिस्पोजेबल डायपर इस्तेमाल करती हैं, तो आप इसका ब्रांड बदलकर देख सकती हैं कि इससे कोई फर्क पड़ता है या नहीं। हो सकता है आपको कोई ऐसा ब्रांड मिल जाएं जो अन्य की तुलना में ज्यादा अवशोषक हो और आपके शिशु की त्वचा के लिए सही रहता हो।

कपड़ों की लंगोंट गर्म पानी में धोएं ताकि जीवाणु मर सकें। डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें पर फिर पानी से अच्छे से धो दें, ताकि साफ लंगोटों पर डिटर्जेंट के अवशेष न रहें। यदि मौसम ठंडा या आर्द्र हो, तो नैपी पर प्रेस करना उन्हें सुखाने का अच्छा तरीका है। यदि कोई कीटाणु बचे हों तो ऐसा करने से वे भी मर जाते हैं।

साफ नैपी पहनाने से पहले जिंक आॅक्साइड युक्त नैपी रैश क्रीम या पैट्रोलियम जैली की एक परत नितंबों पर लगा दें। यह क्रीम शिशु की त्वचा और पेशाब व मल के बीच सुरक्षात्मक परत के तौर पर काम करती है।

सामान्य नैपी रैश देखभाल से तीन से चार दिन में ठीक हो जाते हैं। यदि आपके शिशु के चकत्ते बने रहें या फैलने लगें या फिर स्थिति और बदत्तर होने लगे, तो अपने डॉक्टर से बात करें। वे कुछ दिनों के लिए एंटी-यीस्ट क्रीम या एंटीफंगल क्रीम लगाने की सलाह दे सकते हैं।

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